अराकू, जब से उड़ीसा जाने का प्लान बना, तो गूगल देव ने आंध्रा में स्थित इस पर्वतीय क्षेत्र से अच्छा-भला परिचय करा दिया!! वैसे भी मुझे कभी ये आभास न हुआ कि आंन्ध्रा जैसी पथरी जगह में पहाड़ भी हो सकते है !! क्यूंकि अपने लिये पहाड़ का मतलब पहाड़ होता है, वो पहाड़ जो अपने में भव्यता और विशालता को समेटे हुये रहते हैं!! जिनके तले बेहिसाब हरियाली और भिन्न प्रकार की जैव विविधता पनपती है। पर जब गूगल ने बता ही दिया तो यहाँ जाना जरुरी है और उससे पहले जरुरी है अपने साथ- साथ सभी को इस जगह का एक सूक्ष्म परिचय देना।
पूर्वी घाट की तलहटी में बसा ये क्षेत्र, आंध्रा के मुख्य शहर विज़ाग (विशाखापत्तनम) से एक सौ चौदह किलोमीटर की दूरी पर होने के साथ साथ समीपवर्ती राज्य उड़ीसा की सीमा के काफी निकट है। इस कारण से यहाँ पर दोनों राज्यों की मिली जुली छाप देखने को मिलती है। ये भारत का एक ऐसा स्थल भी है यहाँ पर आदिवासी जन जीवन के पहलुओं को भी जाना पहचाना जा सकता है। आदिवासी संस्कृति का परिचय तो ये देता ही है उसके साथ साथ प्रकृति इस पर जम कर मेहरबान हुयी है। छोटा सा ये शहर अपने में झरने और बगीचे समेटे हुये हैं। बोर्रा केव्स ,पदमपुरा गार्डन और जनजातीय संग्रहालय यहाँ के प्रमुख आकर्षण है। इन के अतिरिक्त जगह जगह पर कॉफी के बागान होने से हरियाली प्रचुर मात्रा में है। पर्यटन के मानचित्र में बहुत ज्यादा उजागर नहीं होने से यहाँ पर बनावटी पन ने अपने कदम अभी तक नहीं जमाये हैं। यहाँ के निवासी सरल और विनम्र है। ये जगह सड़क और रेल द्वारा विज़ाग से भली भांति जुडी हुयी है। परिचय के बाद अब चलते है यहाँ की यात्रा पर। पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा , कैसे हम विज़ाग से ट्रैन द्वारा यहाँ पहुंचे और अब चलते हैं यहाँ के दर्शनीय स्थलों की सैर पर।










