गजब का आकर्षण है हिमालय की गोद में बसे शहर मनाली में, सोचने मात्र से ही नीला आसमान, हिमआच्छादित पहाड़ों की चोटियों पर उमड़ घुमड़ कर आने वाले बादलों और इन्ही पर्वतों की तलहटी में लहराती बलखाती हुयी व्यास नदी के दृश्य आँखों के सामने आ जाते हैं। यहाँ कदम रखने से पहले मन में जो आतुरता थी वो पहुँचने के बाद कम होने के बजाय बढ़कर अपनी चरम सीमा पर पहुँच गयी। इस सुन्दर से पर्वतीय शहर से प्रवेश करते ही ये आभास हो गया था कि यहाँ के बारे में जितना सुन रखा है, वास्तव में ये जगह उससे भी कई गुना बढ़कर है। होटल पहुँच कर चेक इन की औपचारिकता करने के साथ साथ बाद चाय नाश्ते का आर्डर भी साथ में ही दे दिया ,क्यूंकि अब तक पेट में चूहों ने हाहाकार मचा दिया था। होटल स्टाफ ने हमें कमरे तक छोड़ा और हम सामान कमरे में डालकर सीधा बालकनी में चले गए, क्यूंकि चाय के इंतजार में कमरे में बैठने से ज्यादा अच्छा बालकनी में खड़े हो कर यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य से साक्षात्कार करना था। यकीन मानिये यहाँ पर कुदरत इस कदर मेहरबान है कि एक बार बालकनी में कदम रखा तो फिर जब तक चाय नहीं आई अंदर नहीं आ पाये।
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| बर्फ से ढकी पहाड़ियां |