"धरती सुनहरी अम्बर नीला, ऐसा देश है मेरा " सच मे बड़ी ही सुंदर है ये धरा और उससे भी ज्यादा सुंदर है इसके भिन्न- भिन्न रूप। इन सबसे अलग भारत मे तो कुदरत ने प्राकृतिक सौंदर्य भर भर कर दिया है वो भी विविधता के साथ। यहाँ प्रकृति का हर रंग देखने को मिल जाता है कहीं हिमाच्छादित पहाड़ हैं, तो कहीं थार का रेगिस्तान!! कहीं नदियाँ झरने हैं तो कहीं सुंदर छटा बिखराते समंदर के किनारे हैं। इतना कुछ हैं यहाँ अगर भारत भृमण पर निकला जाये तो कई बरस गुजर जाएंगे!! पर अपने स्वार्थ के आगे कितने निष्ठुर हो गये हैं हम सभी, इतने सुंदर उपहार के लिये प्रकृति का धन्यवाद करने की जगह हम इसका अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। सोचने वाली बात है अगर हम इसे अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिये रहने और देखने योग्य बनाये रखना चाहते हैं तो इसके लिये अपने रहन सहन और काम करने के तरीके में मूलभूत सुधार करना बहुत जरूरी होगा। इन सबसे अधिक जरूरी होगा प्रकृति से जुड़ना और उसके रख-रखाव, साफ-सफाई के लिये लगे रहना। यदि समय रहते हमे होश ना आया तो ये बेहतरीन नजारे हमारे आने वाली पीढ़ियाँ केवल नेट जगत में ही देख पायेंगी। आज अर्थ डे पर आप सभी से प्रकृति के रख रखाव के प्रति जागरूक होने के निवेदन के साथ इस फोटोलॉग के माध्यम से धरती विभिन रूप के दर्शन कराने का प्रयास कर रही हूँ।
शिमला-हिमाचल की राजधानी शिमला को पहाड़ो की रानी कद नाम से जाना जाता है। यहाँ के मुख्य पर्यटक स्थलों में जाखू मंदिर, कुफरी, नालधेरा और तारा देवी मंदिर आते हैं। अगर पास में थोड़ा समय हो तो माल रोड ओर रिज में शाम बिताई जा सकती है। सुरंगों और पहाड़ियों के बीच से गुजरने वाली शिमला कालका ट्रैन यहाँ आने वालों के आकर्षण का केंद्र रहती है।
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गोल्फ का मैदान (नालढेरा-शिमला) |
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किस कदर हरा रंग बिखराया गया है यहाँ !! (शिमला अन्ना डेल संग्रहालय) |